सिलेंडर नहीं मिलेगा अगर 30 रुपये नहीं दिए: बरसोई में Swati HP Gas Agency पर उपभोक्ता का आरोप

बरसोई, कटिहार में Md Karim Didar ने Swati HP Gas Agency पर हर LPG सिलेंडर पर ₹30 अतिरिक्त वसूली और डिलीवरी से इनकार का आरोप लगाया।
Media Desk

क़रीम दिदार का गैस एजेंसी की मनमानी के ख़िलाफ़ आवाज़

Hp Gas बेहिसाब वसूली का सिलसिला

कटिहार जिले के बरसोई घाट इलाके में गैस सिलिंडर की सप्लाई संभालने वाली स्वाति एचपी गैस एजेंसी की मनमानी की ख़बरें सुनने में आ रही हैं। स्थानीय निवासी मोहम्मद क़रीम दिदार ने आरोप लगाया है कि एजेंसी का डिलीवरी वाहन हर सिलिंडर पर ₹30 छिपा कर वसूल रहा था, जबकि घरेलू एलपीजी सिलिंडर की खुदरा कीमत में होम डिलीवरी पहले से ही शामिल होती है। एचपीसीएल की वेबसाइट भी ग्राहकों को साफ़ कहती है कि वे रसीद (कैश मेमो) पर लिखी कीमत के अलावा कुछ न चुकाएं।

न्यूज रिपोर्टों से पता चला है कि देश के अन्य हिस्सों में भी यह प्रकार्य रिवाज़ बन चुका है। कश्मीर के हैंडवाड़ा (मावेर) इलाके में स्थानीय उपभोक्ताओं ने गैस सिलिंडर की कीमत ₹950 बताए जाने के बावजूद रसीद पर ₹930 दर्ज करने की शिकायत की है। इसके अलावा तमिलनाडु में इंडियन ऑयल के डिलीवरी कर्मचारियों की यूनियन ने आरोप लगाया है कि कई डीलर कर्मचारियों को वेतन नहीं देते और उन्हें ग्राहकों से अतिरिक्त “टिप” वसूलने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसी ख़बरों ने इस घोटाले को लेकर आस-पास के उपभोक्ताओं में भारी रोष भर दिया है।


साहसिक संघर्ष का रंग

मोहम्मद क़रीम दिदार पहले भी कई सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। पढ़े-लिखे और क़ानूनी जानकार होने के कारण वे अपने अधिकारों के प्रति सशक्त रहे हैं। बारसोईघाट के आस पास रहने वाले दिदार के दिल में गैस सिलिंडर की इस मनमानी ने आग लगा दी। जब दुकान पर था कि तभी सिलिंडर डिलीवरी के लिए पहुँचा। 

डिलीवरी वाले ने चौंकते हुए बोला, “भइया, ₹30 और दे दो, नहीं तो सिलिंडर नहीं देंगे।” यह कोई निवेदन नहीं, अवैध दबाव जैसा था।

दिदार ने भौंहें चढ़ाते हुए कहा, “रसीद पर जो कीमत लिखी है, वही सही है; बाकी ₹30 क्यों मांग रहे हो?” एजेंसी मालिक ने बहस में कहा, “देखो, डिलीवरी में इंधन-पेट्रोल का खर्चा पड़ता है, इसलिए लोग टिप दे देते हैं।” लेकिन दिदार ने कड़क लहजे में जवाब दिया, “ऐसी कोई अनुमति नहीं है, मैंने तय रेट पर ही सिलिंडर लिया है।” उनके शब्दों में ठहराव था, वे अपने हक़ से समझौता करने को तैयार नहीं थे।

मालिक झिड़कता हुआ बोला, “अगर आप नहीं दोगे तो बाकी लोग देंगे, हमें क्या होगा?” दिदार ने ठान लिया कि यह बहाना बर्दाश्त नहीं करेगा। उसने अपने मुल्क के कायदे-क़ानून का हवाला देते हुए कहा, “ऐसी डाक-पार्सल वाली वसूली नहीं चलेगी, नहीं तो शिकायत दर्ज कर दूँगा।” उनका स्वर दृढ़ था, भ्रामक दलीलों का कोई असर नहीं हुआ। दिदार ने आसपास का नज़ारा देखा कई लोग मजबूरी में अतिरिक्त शुल्क चुकाने को मजबूर बैठे थे। फिर उन्होंने एजेंसी के मालिक को चेताया कि वह चुप नहीं बैठेंगे। दोनों के बीच तनातनी अब खुलकर सामने थी, और दिदार ने दृढ़ स्वर में कहा, “मैं अपनी शिकायत ज़िला उपभोक्ता आयोग में दर्ज कराऊँगा।”


क़ानूनी शिकंजा

क़रीम दिदार को मालूम है यह सब क़ानूनन ठीक है, तो जवाब मिला कि ग्राहक के पास एक और बड़ी ताक़त है: शिकायत दर्ज कराने का अधिकार। वास्तव में 2019 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में यह साफ़ लिखा है कि ग्राहक ‘जरूरत से ज़्यादा वसूली’ के खिलाफ जिला या राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर सकता है। दिदार ने न सिर्फ़ एजेंसी मालिक के खिलाफ शिकायत दी, बल्कि तेल निगम को भी सूचित किया। भारतीय तेल निगम ने चेतावनी दी है कि यदि कहीं रसीद में लिखी राशि से ज्यादा वसूली हो रही हो तो उपभोक्ता 1906 हेल्पलाइन या 1800-2333-5555 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इससे स्पष्ट है कि कंपनियां भी उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए तैनात हैं।


उपभोक्ता अधिकार और जुर्माना

दिदार ने कानून का सहारा लेते हुए कहा कि गैस एजेंसी की कार्रवाई केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की नज़र में भी अनुचित होगी। असल में CCPA ने हाल ही में रेस्टोरेंट्स में जबरन वसूले जाने वाले सेवा शुल्क को उपभोक्ता अधिनियम की धारा 2(47) के तहत ‘अनैचित व्यापार प्रथा’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि ऐसी प्रथा पर ₹50,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गैस एजेंसी को भी इसी कानून की जद में लाया जा सकता है। दिदार ने कहा, “ऐसी मनमानी ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन है।


उम्मीद की किरन

मोहम्मद क़रीम दिदार ने इस एक घटना के ज़रिए साबित किया कि आम आदमी भी अत्याचार के ख़िलाफ़ डट सकता है। उन्होंने खुद को सिर्फ़ गैस उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाने वाला जागरूक नागरिक साबित किया। उनकी यह लड़ाई अमानवीय मनमानी के ख़िलाफ़ हक़ की जुनूनी पुकार बनकर उभरी। जैसे उजड़े रास्तों पर आसमां की धुन सुनने से उम्मीद जगती है, वैसे ही दिदार की जंग ने उम्मीद की एक नई किरन जगा दी है। उनके साहस ने आसपास के लोगों में जागरूकता फैलाई है और कई युवा उनके नक्श-ए-कदम पर चलने का निश्चय कर चुके हैं।