Md Aftab Taj: कटिहार के सामाजिक कार्यकर्ता की दस्तावेज़ी जीवनी
कटिहार, बिहार का एक पिछड़ा हुआ जिला है, जिसे 2006 में देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों में शामिल किया गया था। कृषि इस क्षेत्र की मुख्य अर्थव्यवस्था है, फिर भी यहां की आबादी में साक्षरता दर औसतन मात्र 53.5% है। इसी कटिहार जिले के बारसोई उप-विभाग के (Basagaon) इलाके से ताल्लुक रखने वाले (Md Aarab Taj) एमडी आफ़ताब ताज़ ने सामाजिक कल्याण के काम को अपना मिशन बनाया। स्थानीय जानकारी के अनुसार उनकी पत्नी जिला परिषद की सदस्य हैं और आफ़ताब ताज़ स्वयं जिला परिषद का उम्मीदवार हैं।
साम्प्रदायिक सौहार्द और सामाजिक समरसता की भावना को आत्मसात रखते है, Md Aarab Taj“गंगा-जमुनी तहज़ीब” की मिसाल हैं, जो हिन्दू-मुस्लिम सांस्कृतिक के संगम को निखारती है।
अल-शहादत वेलफेयर ट्रस्ट: सामाजिक मिशन
अफ़ताब ताज़ द्वारा संचालित अल-शहादत वेलफेयर ट्रस्ट कटिहार के basagaon में स्थित है। (Justdial के अनुसार इसका पता Village Basagaon, P.O. Jalki, via Barsoi, B.Balrampur, Katihar-855102, Bihar है.)
यह ट्रस्ट शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत एक बेहतरीन एनजीओ माना जाता है। कटिहार में सामाजिक सुधार एवं अनाथों/वंचितों की सेवा में सक्रिय अन्य संगठनों की तरह, अल-शहादत ट्रस्ट भी आमजन को राहत सामग्री, चिकित्सा शिविर और शिक्षा संबंधित सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य करता है। लेखक Md Karim Didar को स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अभाव में ट्रस्ट के विस्तृत कार्यक्रमों का विवरण नहीं मिला है, फिर भी जनहित और जनता की हक के इन कार्यों को अंजाम देने वाला यह संस्था कटिहार की प्रमुख संस्थाओं में गिनी जाती है।
अल-शहादत ट्रस्ट आमतौर पर सामुदायिक सहायता एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत माना जाता है। इसी के अंतर्गत इक़रा कोचिंग सेंटर और मदनी यतीमखाना जैसी पहल भी हैं।
इक़रा कोचिंग सेंटर गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा, कोचिंग और मार्गदर्शन प्रदान करता है, जबकि मदनी यतीमखाना अनाथ और बेसहारा बच्चों का परवरिश करने में एक अहम भूमिका निभाते है। इन संस्थाओं का उद्देश्य मुख्यतः निम्नलिखित है:
नि:शुल्क शिक्षा: आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चे (विशेषकर मुसलमान समुदाय के) को मुफ्त स्कूली शिक्षा दिलाना।
पाठ्य सामग्री वितरण: बच्चों को किताबें, कलम-पेंसिल और अन्य स्टेशनरी समान उपलब्ध कराना।
अन्य सहायता: जरूरतमंद परिवारों को कंबल और वस्त्र प्रदान कर ठंड में राहत पहुँचना, तथा अनाथ बच्चों को आश्रय-भोजन उपलब्ध कराना।
इन पहलों का स्वरूप ‘ मिशन हर हाथ में कलम’ जैसे व्यापक शैक्षिक अभियान से जुड़ा हुआ है। ‘हर हाथ में कलम’ का मुख्य उद्देश्य कच्चे मकान या पिछड़े इलाकों में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अन्य संसाधन प्रदान करना है। उदाहरण के लिए ‘हर हाथ में कमल’ अभियान जिन बच्चों की पढ़ाई पहले संभव नहीं थी, अब उन्हें न केवल स्कूल की शिक्षा बल्कि नि:शुल्क स्टेशनरी, पोशाक और भोजन भी मुहैया कराकर उनका सर्वांगीण विकास कर रहा है। आफ़ताब ताज़ की इक़रा कोचिंग और मदनी यतीमखाना इस सिद्धांत पर काम करते हैं।
शिक्षा अभियान: “हर हाथ में कलम” की तर्ज पर
अफ़ताब ताज़ की पहलों में शिक्षा को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। उसका मानना है कि समाज के विकास के लिए हर व्यक्ति को पढ़ने-लिखने का अवसर मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत वह इक़रा कोचिंग सेंटर के माध्यम से गरीब बच्चों को मुफ्त कोचिंग तथा पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराता है। ‘हर हाथ में कलम’ मुहिम के तहत काम करने वाली संस्थाएं गरीब वार्डों के बच्चों को स्कूल से जोड़ती हैं और उन्हें आवश्यक सुविधाएँ देती हैं।
मुफ्त शिक्षा के साथ स्टेशनेरी वितरण: बच्चे के पिता के अनुसार, बच्चे शिक्षा के साथ-साथ नि:शुल्क स्टेशनरी (किताबें, कलम-पेंसिल), वस्त्र (ड्रेसमटेरियल, कम्बल) मिलती हैं।
कोचिंग कार्यक्रम: इक़रा कोचिंग सेंटर में अलग-अलग कक्षाएं चलती हैं, जहाँ अलग-अलग विद्यालयी बोर्ड (बिहार बोर्ड सहित) के पाठ्यक्रम पढ़ाए जाते हैं। कमजोर बच्चों को विशेष ध्यान दिया जाता है।
अन्य सामाजिक सहायता: गर्मी और सर्दी में ज़रूरतमंदों को अल्टरनेट वस्त्र और रजाइयाँ दी जाती हैं। कई बार स्कूल यूनिफॉर्म और पुस्तकें नि:शुल्क वितरित की जाती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई में बाधा न आए।
इन पहलों के माध्यम से गरीब परिवारों के बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है। जहाँ सरकार के आदेशानुसार स्कूल शिक्षा निश्चित है, वहीं कई परिवार आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेज पाते। ऐसी स्थिति में आफ़ताब ताज़ जैसे सामाजिक कार्यकर्ता स्वयंसेवकों के साथ मिलकर बालकों को “हर हाथ में कलम” की मुहिम से जोड़ते हैं।
खेलकूद और सांस्कृतिक रूचियाँ
अफ़ताब ताज़ का जीवन केवल शिक्षा केंद्रित नहीं है; उन्हें खेलों में भी गहरी दिलचस्पी है। लेखक करीम दीदारके मुताबिक वे बेलवा, तालवा और गैघट्टा के मैदानों में फुटबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराते हैं। युवा वर्ग को सकारात्मक दिशा देने के लिए वे अक्सर स्थानीय स्तर पर फुटबॉल क्लब और टूर्नामेंटों का समर्थन करते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई नेशनल लेबल के न्यूज रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, लेकिन लेखक करीम दीदार के अनुसार इन गतिविधियों ने गांव के खिलाड़ियों में जोश भरने का काम किया है।
खेलों के साथ-साथ आफ़ताब ताज़ सांस्कृतिक झुकाव
आफताब ताज गंगा जमुनी विचारधारा के समर्थक हैं। कहते हैं कि कटिहार और आसपास के इलाके में हिन्दू-मुस्लिम दोनों ही पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं। यही गंगा-जमुनी तहज़ीब की भावना है, जिसमें सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्यौहारो का सम्मान करते हैं। आफ़ताब ताज़ इसी संस्कृति को मानते हुए हिन्दू-मुस्लिम भाइचारे की महत्ता पर जोर देते हैं और अपने कार्यों में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का संदेश देते हैं। उनके अनुभव में, समाज तभी समृद्ध होता है जब सबको बराबर का अधिकार मिले और कोई भी वर्ग छूट ना जाए।
निष्कर्ष
आफ़ताब ताज़ का व्यक्तित्व सामाजिक सेवा और समावेशी संस्कृति का परिचायक है।
कटिहार जिले जैसे पिछड़े और अल्पसाक्षर क्षेत्र में उन्होंने शिक्षा, खेल और सामुदायिक सहायता के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने की कोशिश की है। अल-शहादत वेलफेयर ट्रस्ट के तहत चल रहे इक़रा कोचिंग सेंटर और मदनी यतीमखाना के माध्यम से उन्होंने “हर हाथ में कलम” के आदर्शों को साकार करने का प्रयास किया है, जिससे पिछड़े हालात में जी रहे गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा एवं आवश्यक सामग्री मुहैया हो सके।
स्रोत: उपलब्ध संसाधनों एवं प्रकाशनों (Justdial लिस्टिंग, शैक्षिक अभियानों की वेबसाइट, जिला सांख्यिकी) से संकलित जानकारी के आधार पर तैयार किया गया यह दस्तावेज़।