कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड में मिड-डे मील (MDM) की गुणवत्ता को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद जिला परियोजना पदाधिकारी (DPO) ने औचक निरीक्षण किया। यह कार्रवाई तब की गई जब पिछले कुछ दिनों से बच्चों और स्थानीय लोगों की ओर से खाने की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
शिकायतों में कहा गया था कि कुछ जगहों पर बच्चों को खराब खाना दिया जा रहा है। साथ ही खाने में प्लास्टिक और कीड़े जैसी चीजें मिलने की बात भी सामने आई थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने तुरंत जांच का फैसला लिया।
जांच के लिए अलग-अलग टीम बनाई गईं और उन्हें विभिन्न स्कूलों में भेजा गया। DPO निसित कुमार सिंह खुद भी कुछ स्कूलों में पहुंचे। उन्होंने मध्य विद्यालय नवगाम, पीएस एक्साल्ला, पीएस धट्टा बंगरोरा और एमएस कोटहाहर जैसे स्कूलों का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने स्कूलों में जाकर बच्चों से सीधे बात की और खाने की स्थिति के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने मौके पर खाना भी देखा और उसकी गुणवत्ता जांची।
दूसरी ओर, अन्य टीमों ने भी कई स्कूलों का निरीक्षण किया। इनमें पीएस बोचबारी, यूएमएस सिराजमनी, एमएस अबादपुर और पीएस बदगांव जैसे स्कूल शामिल थे।
जांच के दौरान अधिकांश जगहों पर अधिकारी खाने की स्थिति को लेकर संतुष्ट नजर आए। हालांकि, कुछ बच्चों ने यह शिकायत की कि पिछले दिनों खाना समय पर नहीं मिला या फिर ठंडा था।
निरक्षण के बाद अधिकारियों ने मिड-डे मील चला रही संस्था को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाए, ताकि बच्चों को सही और सुरक्षित भोजन मिल सके।
साथ ही स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से भी कहा गया है कि वे समय-समय पर खुद खाना बनते हुए देखें और उसकी गुणवत्ता की जांच करें।
अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि अगर आगे भी किसी तरह की शिकायत मिलती है, तो सीधे कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी समस्या की जानकारी सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।
जांच के बाद अधिकारियों ने कहा कि कई शिकायतें अफवाह भी हो सकती हैं, लेकिन फिर भी हर शिकायत की जांच जरूरी है। इस औचक निरीक्षण के बाद फिलहाल MDM को लेकर चल रही कई आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की गई है।
बारसोई में मिड-डे मील को लेकर उठे सवालों के बीच की गई इस जांच ने स्थिति को साफ करने में मदद की है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी कहा है कि आगे भी इस तरह की निगरानी जारी रहेगी, ताकि बच्चों को बेहतर भोजन मिल सके।
