Seemanchal में बच्चा चोर की अफ़वाह, भीड़ और निर्दोष फकीर बुर्जुग इल्ज़ाम का शिकार | Katihar, Kishanganj, Purnia

Seemanchal में बच्चा चोर की अफ़वाह, भीड़ और निर्दोष फकीर बुर्जुग इल्ज़ाम का शिकार
Media Desk
Seemanchal में बच्चा चोर की अफ़वाह, भीड़ और निर्दोष फकीर बुर्जुग इल्ज़ाम का शिकार | Katihar, Kishanganj, Purnia
Seemanchal में बच्चा चोर की अफ़वाह, भीड़ और निर्दोष फकीर बुर्जुग इल्ज़ाम का शिकार  रमज़ान का महीना आया है। यह महीना भूख का नहीं, ज़मीर का इम्तिहान होता है। सब्र का इम्तिहान। सोच का इम्तिहान। और इंसानियत का इम्तिहान। लेकिन कटिहार के गांवों में इन दिनों जो माहौल है, वह इस मुक़द्दस महीने से मेल नहीं खाता। हर तरफ़ डर है। हर चेहरे पर शक है। और हर अजनबी संभावित गुनहगार बना दिया गया है। अगर कोई बाहर का आदमी दिख जाए, अगर कोई गरीब इधर-उधर भटकता मिले, अगर कोई दिमाग़ी तौर पर परेशान इंसान नज़र आए, तो भीड़ तय कर लेती है। “यही बच्चा चोर है।” बिना पूछे। बिना सोचे। बिना सबूत। एक अफ़वाह कैसे आग बनती है अफ़वाह अकेली नहीं आती। वह डर को साथ लाती है। डर गुस्सा पैदा करता है। और गुस्सा अक्ल को मार देता है। यही वजह है कि अफ़वाह फैलते ही भीड़ जमा हो जाती है। भीड़ पर ओशो क्या कहते हैं ओशो कहते हैं  इंसान अकेले में सोचता है, लेकिन भीड़ में वह सिर्फ़ नकल करता है। भीड़ आदमी को ताक़त नहीं देती, भीड़ आदमी से ज़िम्मेदारी छीन लेती है। भीड़ में खड़ा इंसान यह नहीं कहता  “मैंने मारा” वह कहता है  “सब मार रहे थे।” यही बात दूसरे विद्वान भी कहते हैं समाजशास्त्री क…