बाबा गोरखनाथ धाम सालमारी: कटिहार के ‘मिनी बाबाधाम’ की अनकही इतिहास और आस्था की कहानी

कटिहार के आजमनगर स्थित बाबा गोरखनाथ धाम सालमारी की प्राचीन आस्था, लोककथाएं, मेला और ‘मिनी बाबाधाम’ कहलाने की पूरी डॉक्यूमेंट्री
बाबा गोरखनाथ धाम सालमारी: कटिहार के ‘मिनी बाबाधाम’ की अनकही इतिहास और आस्था की कहानी
कटिहार ज़िले के आजमनगर प्रखंड में बसा सालमारी—एक ऐसा गाँव, जहाँ सुबह की पहली रोशनी खेतों की मेड़ों पर उतरती है, जहाँ हवा में मिट्टी की सोंधी गंध है, और जहाँ आस्था किसी ग्रंथ की पंक्ति नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन की लय है।  इसी सालमारी की गोद में स्थित है बाबा गोरखनाथ धाम, जिसे लोग प्रेम और श्रद्धा से “मिनी बाबाधाम” कहते हैं।  यह नाम यूँ ही नहीं पड़ा। यहाँ की आस्था, यहाँ की यात्रा, यहाँ के व्रत–विधान और यहाँ की लोककथाएँ—सब मिलकर इस स्थान को सीमांचल के धार्मिक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान देती हैं। यह डॉक्यूमेंट्री किसी दूर बैठे इतिहासकार की शुष्क रिपोर्ट नहीं है। यह इस लेखक (Md Karim Didar) की आँखों से देखी–सुनी कथा है, जिसने सालमारी की पगडंडियों पर चलकर लोगों की बात सुनी, जिनके लिए बाबा गोरखनाथ सिर्फ़ एक नाम नहीं—जीवन का भरोसा हैं नाथ परंपरा और बाबा गोरखनाथ: एक व्यापक संदर्भ भारतीय उपमहाद्वीप में नाथ परंपरा की जड़ें बहुत गहरी हैं। योग, साधना, तप और लोकजीवन से जुड़ी यह परंपरा सदियों से समाज के भीतर–भीतर बहती रही है। इसी परंपरा के सबसे प्रभावशाली नामों में बाबा गोरखनाथ का उल्लेख किया जाता…